(डीयू और तुम)...
तारिक़- एक्सक्यूज़ मी
रश्मि-यस कहिये मैय आई हेल्प हु।
तारिक़-जी ये स्टाफ रूम किधर है?
रश्मि-यहाँ से लेफ्ट पर सेकंड रूम
तारिक़-शुक्रीया।
ये कहकर तारिक़ चला जा रहा था तभी रश्मि ने आवाज़ देकर कहा तारिक़ तुम नवजीवन(स्कूल) वाले तारिक़ खान तो नही हो।
तारिक़ चोंकते हुए हां रश्मि दौड़ती हुई उसके पास आई और बोली "में तेरी मोटी" रश्मि वर्मा
तारिक़ चौंक गया और आँखों में आंसुओ को लिए मुस्कुराकर दोनों गले लग गए कहा ते तुम क्यों चले आये मेरठ से बस क्या कहु?...
तारिक़- बस वही था जहा तुम छोड़ कर आई थी।
रश्मि-कंफ्यूज होकर क्या मतलब समझी नही में?
तारिक़- कुछ नही #तुम बताओ तुम #डीयू में कैसे और यहाँ केसी वालंटियर बनी खड़ी हो एक साल में बहुत बदल गयी।
रश्मि- हा थोडा छात्र संघ ज्वाइन किया है वेसे कहा रह रहे हो तुम?
तारिक़-यही हु पीजी लिया है मलका गंज में
रश्मि- वाह(खुश होते हुए)अच्छा लाओ नंबर दो अपना अब तो मिलते रहेंगे।
तारिक़-हा लेलो अच्छा में चलता हु.
रश्मि- ठीक है बाय.
थका हारा हुआ तारिक़ अपने फ्लैट मलका गंज में अंदर पहुंचा और गेट बन्द करके मुंह धोकर पानी को बोतल हाथ में लिए अपने बर्तन, बुक्स और चादरों से भरे बिस्तर पर लेट गया और टीवी ओं करते हुए लेट गया और अपना नेट स्टार्ट किया आउट स्टार्ट करते ही उसे पहला मेसेज रश्मि का मिला वो हैरत में था..
रश्मि- हेल्लो
तारिक़- हाय
रश्मि- कैसे हो
तारिक़- ठीक हु तुम बताओ
रश्मि-तुमने खाना खाया...
इतनी जल्दी दोनों खूब घुल मिल गए और हसींन हसीन बातें शुरु हुई..
और बातों का सिलसिला लगातार 2 घण्टे चलता हु ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में मिलने के वादे पर खत्म हुआ..
रश्मि- अच्छा बाय गुड नाईट टेक केअर..
तारिक़- बाय ध्यान रखो अपना...
और दोनो कल के रेशमी मुलाक़ात के सपने लिए सो गए...
चमकदार गाड़ी, बड़ा बंगला रश्मि और तारिक़ अपनी गाड़ी में बैठकर बंगले के पास उतर रहे है जहा एक बड़ा क़ालीन बिछा हुआ है और तारिक़ गाडी से उतरता है हाथ बढ़ा कर उसे उतारने ही वाला था की गाडी पर ज़ोर कोई थप ठप करता है तारिक़ गुस्सा हो जाता है और थप थप ज़ोर से होने लगती है.... तभी उसकी आँख दरवाज़े पर होती ठप ठप से खुलती है और वो जाकर गेट खोलता है और दूध लेता है।
तभी उसका फ़ोन बजता है और नींद में ही फ़ोन उठाता है दूसरी तरफ रश्मि थी वो एक दम से जाग जाता है।
रश्मि- कहा हो तुम झुटे, लापरवाह में आधे घण्टे से वेट कर रही हु तुम्हारा .....
तारिक़- अरे आया बस 15 मिनट में पहुंचा ज़ाकिर हुसैन आना है न?
रश्मि-तुम्हे याद है थैंक गॉड
तारिक़- अरे आता हु बाय वेट करो।
रश्मि मुंह बनाकर फ़ोन काट देती है लेकिन तारिक़ जितनी जल्दी रेडी हो रहा था उतना ही हैरत में भी था की इतना अपनापन कैसे और वो जल्दी से बिना कुछ खाये पिए रेडी होकर उसैन बोल्ट बनकर ऑटो पकड़ता है और मीटर पर नज़र मारकर ज़ाकिर हुसैन कह कर बेठ जाता है........
तारिक ऑटो से उतरता है ऑटो वाले को पेसे देता है और भागकर जाकिर हुसैन कॉलेज मे घुसता है, जहा गेट पर जाते ही उसकी टक्कर रश्मि से होती है. वो सम्भल कर रुकता है ,और रश्मि गुस्से की शक्ल मे उसे देखती है.
रश्मि - कहा थे तुम इतनी देर ?
तारिक - सॉरी वो तब्येत सही नही तो याद नही रहा.
रश्मि- (घबराते हुए) क्या हुआ? बताया क्यों नही ? ज़रूर कुछ गलत खाया होगा?...
तारिक - अरे अरे चुप तो हो जाओ . वो बस थकन सी थी थोड़ी और कुछ नही..
रश्मि- अच्छा छोड़ो कही नही जा रहे तबियत सही नही तुम्हारी...
तारिक - फॉरगेट इट(डांटने के अंदाज़ मे कहते हुए) चलो भी..
रश्मि- ओके न गुस्सा मत करो चलो चलते है ..
तारिक़ ने ऑटो वाले को आवाज़ दी और वो दोनों उसमे बेठ कर चल दिए।
तारिक़ और रश्मि चुप और गर्म दोपहर की तरह साथ साथ ऑटों में बेठे हुए मेट्रो स्टेशन तक का सफ़र कर रहे थे दोनों के बीच एक अदद भी बातचीत का दौर नही चल रहा था बरहाल मेट्रो स्टेशन आया और दोनों उतरे तारीक़ रश्मि के पैसे देने स्व पहले ही पैसे दे चूका था और वो मेट्रों स्टेशन में दाखिल हालांकि तारिक़ के लिए ये मेट्रों नई थी लेकिन वो जल्दी ही इसमें घुल मिल गया था दोनों ने एंट्री की मेट्रों का वेट करने लगे तभी मेट्रों आई और लोगों के हुजूम में डगमगाती मेट्रो में वो किसी तरह चले गए।
मेट्रों में दोनों एक़ दूसरे के करीब आकर खड़े हो गए थे और वो भी इतना करीब जिससे दोनों शर्मा रहे थे और वो दोनों एक दूसरे को देखने लगे तभी रश्मि बोली...
रश्मि-कोई चान्स तो नही लेना है न बता दो.....
तारिक़- हंसा और बोला नही यार बिलकुल नही वेसे तुम....
रश्मि- क्या हुआ बोलो चुप क्यों हो गए....
तारिक़- तुम इस भीड़ में अलग सी लगती हो मानों तुम्हे देख के बहुत अपनापन सा लगता,...
रश्मि-अच्छा फ्लर्ट कर रहे हो....
तारिक़- रश्मि...
रश्मि- तारिक़ कुछ नही ....
तारिक़ इस उधेड़बुन में खोया हुआ था की कैसे अपने दिल को बातों को बाहर निकाले कैसे बताये लेकिन ऐसी की ठण्डी हवाओं में रश्मि को अपने पास महसूस कर रहा था और एक अजीब सी ख़ुशी में मुब्तिला था....
तारिक़ और रश्मि साथ साथ मेट्रों में खड़े थे और मेट्रो में भीड़ की इन्तहा बढ़ती जा रही थी,तारिक़ और रश्मि बिलकुल करीब आ गए थे,इतना क़रीब मानों एक साथ खड़े हो और इस हालत में कम से कम तारिक़ बहुत अजीब सा फील कर रहा था और वो हेसिटैत हो रहा था उसे देख कर रश्मि बोली...
रश्मि- तारिक़ आर यू ऑल राइट?
तारिक़- हा घबराते हुए ...
तभी मेट्रो स्टेशन आया और वो दोनों उतर गए और वाल्क करते हुए इस्कॉन टेम्पल पहुंच गए इन कुछ दिनों की मुलाक़ात में दोनों के बीच नज़दीकियां बढ़ गयी थी और कम से कम रश्मि सुकून महसूस करने लगी थी तारिक़ के साथ लेकिन लेकिन तारिक़ एक अलग फ़िक्र में मुब्तिला था और उसे दो साल पुरानी बात खायी जा रही थी और वो इस्कोन टेम्पल के रस्ते में ही खोया हुआ चल रहा तभी रश्मि ने उसके हाथ में हाथ में डाल लिया लेकिन तारिक़ अजीब सी कैफ़ियत में था और उसे देख कर रश्मि बोली...
रश्मि- तारिक़ क्या हुआ तबीयत ठीक है~?
तारिक़-नही कुछ याद कर रहा था..
रश्मि- ओके चलो काफी घूम लिए अब चले?
तारिक़- हां बिलकुल..में ऑटों कर लेता हुआ
रश्मि-वही सही है..
तारिक़- अच्छा अब कल कहा मिलोगी?
रश्मि-कल हम कैम्पस मिलेंगे आर्ट फैकल्टी ओके
तारिक़- ठीक है।।
रश्मि को हॉस्टल छोड़ छोड़ तारिक़ अपने रूम पर चला गया लेकिन रश्मि परेशान थी वो अजीब सा कुछ महसूस कर रही थी क्या उसे नही पता और वो बिना खाना खाए अपने रूम मे जाकर सो गयी और खो गयी एक अलग दुनिया मे जहा वो जाना नही चाहती थी मगर जा रही थी. मगर वो बहुत खुश थी।
अगले दिन सुबह तारिक़ के कमरे में ज़ोर ज़ोर से "मटरगश्ती खुली सड़क पे" गाना चल रहा था और तारिक़ बहुत डिस्टर्ब हो रहा था वो झल्ला कर उठा और चिढ़ता हुआ चारों तरफ देखने लगा .तभी उसकी नज़र अपने फ़ोन पर गयी जिसमे वो गाना बज रहा था.उसने जल्दी से फ़ोन रिसीव किया तो वहा से अर्जुन उसका एक मात्र दोस्त था वो बोला...
अर्जुन-अबे भाई क्या भांग पी कर सोया है..
तारिक़-नही यार कल ज़रा रश्मि के साथ था तो थक गया..
अर्जुन-भाई भाभी ढूंढ ली, बताया भी नही.
तारिक़- नही यार तू बोल क्यों फ़ोन किया था?
अर्जुन-भाई असाइनमेंट देना है आज
तारिक़- अबे मर गया चल बाद में बात करता हु...
तारिक़ सर पर हाथ मारने लगा इधर भगा उधर भागा नहाने बाथरूम में घुसा तो फिसल गया,भागता हु गया तो हाथ दीवार पर लग गया ,अब वो बाथरूम में घुसा ही था फोन बजने लगा वहां से भाग कर देखा तो रश्मि थी .उसने रिसीव नही किया और भागकर क्लास पहुंचा इस बीच रश्मि ने कई फोन किया रिसीव नही किये और वो शाम तक देश बदलने जेसी मेहनत में असाइन मेंट बनाता रहा वो वहा से निकला ही था की रश्मि वही खड़ी थी. वो उसे देखकर चौंक गया... रश्मि उससे चिपट कर रोने लगी बहुत रोई...... जारी.....
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